Friday, 2 September 2011

मसाला ब्रेड



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देश भारत
क्षेत्र पूरे भारत में खायी जाती है।
मुख्य सामग्री 10 ब्रेड स्लाइस, 2 कप प्याज (बड़े टुकड़ो में कटी हुई), 3 टमाटर (पिसे हुए), 5-6 कप पानी
हरी मिर्च 3
लहसुन 8-10 कलियां
अदरक 1 चाय की चम्मच कटी हुई
नमक स्वादानुसार
हरा धनिया 2 चाय की चम्मच (बारीक कटा)
जीरा 1/2 चाय की चम्मच
अमचूर पाउडर 1/2 चाय की चम्मच
हल्दी पाउडर 1/2 चाय की चम्मच
धनिया पाउडर 1 चाय की चम्मच
तेल 1 चाय की चम्मच
उपकरण गैस-चूल्हा, कढ़ाही, बड़ी चम्मच आदि
अन्य जानकारी 5 लोगों के लिए




विधि
  1. हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, प्याज और हरा धनिया बारीक पीस लें।
  2. एक कढ़ाही में तेल डालकर गरम करें, जीरा डालकर चटकने दें।
  3. जो प्याज, लहसुन, अदरक वाला पेस्ट बनवाया है उसे इस तेल में डालकर भून लें।
  4. टमाटर का पेस्ट डालकर अच्छी तरह भून लें।
  5. इसमें धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, पानी और नमक डाल दें।
  6. ब्रेड के टुकड़े डाल दें। जब ब्रेड करी का पानी सोख ले, तो गर्मागर्म मसाला ब्रेड को पापड़ और प्याज के छल्लो के साथ तुरंत परोसें।


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Friday, 26 August 2011

जलेबी


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जलेबी उत्तर भारत, पाकिस्तान व मध्यपूर्व का एक लोकप्रिय व्यंजन है। इसका आकार पेंचदार होता है और स्वाद करारा मीठा। इस मिठाई की धूम भारतीय उपमहाद्वीप से शुरू होकर पश्चिमी देश स्पेन तक जाती है। इस बीच भारत,बांग्लादेश, पाकिस्तान, ईरान के साथ तमाम अरब मुल्कों में भी यह खूब जानी-पहचानी है। आमतौर पर तो जलेबी सादी ही बनाई व पसंद की जाती है, पर पनीर या खोया जलेबी को भी लोग बडे चाव से खाते हैं।

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इतिहास

कुछ लोगों का मानना है कि जलेबी मूल रूप से अरबी शब्द है और इस मिठाई का असली नाम है जलाबिया। यूं जलेबी को विशुद्ध भारतीय मिठाई मानने वाले भी हैं। शरदचंद्र पेंढारकर (बनजारे बहुरूपिये शब्द) में जलेबी का प्राचीन भारतीय नाम कुंडलिका बताते हैं। वे रघुनाथकृत ‘भोज कुतूहल’ नामक ग्रंथ का हवाला भी देते हैं जिसमें इस व्यंजन के बनाने की विधि का उल्लेख है। भारतीय मूल पर जोर देने वाले इसे ‘जल-वल्लिका’ कहते हैं । रस से परिपूर्ण होने की वजह से इसे यह नाम मिला और फिर इसका रूप जलेबी हो गया। फारसी और अरबी में इसकी शक्ल बदल कर हो गई जलाबिया। उत्तर पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में जहां इसे जलेबी कहा जाता है वहीं महाराष्ट्र में इसे जिलबी कहा जाता है और बंगाल में इसका उच्चारण जिलपी करते हैं। जाहिर है बांग्लादेश में भी यही नाम चलता होगा।

व्यंजन विधि

आवश्यक सामग्री- मैदा — २०० ग्राम या २ कटोरी, ईस्ट— आधा चम्मच, पानी — २ कटोरी, घी — तलने के लिये
विधि- ईस्ट के दाने गुनगुने पानी में १० - १२ मिनिट के लिये भिगो दें, इसको पानी में घोल लें। एक बर्तन में मैदा और ईस्ट का घोल डालें, पानी डाल कर मैदा को घोलें, घोल अधिक गाढ़ा या पतला न हो। इस घोल को करीब १२ घंटे के लिये ढककर रख दें। १२ घंटे के अन्दर इस घोल में खमीर उठ आयेगा और यह जलेबी के लिए तैयार हो जाएगा। जलेबी बनाने के लिये पहले इसकी चाशनी तैयार करें। उसके बाद जलेबी तल कर चाशनी में डालें। चाशनी बनाने की विधि नीचे दी गई है। जलेबी बनाने के लिये कढ़ाई ज्यादा चौड़ी और कम गहरी होती है। कढ़ाई में घी गरम करें। जलेबी बनाने के लिये एक विशेष प्रकार का कपड़ा या डिब्बा बाजार में मिलता है। जलेबी बनाने के लिये दूध की थैली से निकली प्लास्टिक का उपयोग भी कर सकते हैं।
खमीर उठे मैदे के मिश्रण को अच्छी तरह से फेंट लें। इसे जलेबी बनाने वाले डिब्बे या थैली में भरकर इसकी की धार हाथ को गोल गोल चलाते हुये कढ़ाई में डालें। कुरकुरी होने तक सेंकें। सिंकी हुई जलेबियाँ कढ़ाई से निकाल कर चाशनी में डालें। ५ मिनिट बाद चाशनी से निकाल कर प्लेट में रखें। इसी तरह सारी जलेबियाँ तैयार कर लें।
चाशनी के लिये आवश्यक सामग्री- चीनी — ४०० ग्राम ( ४ कटोरी ), पानी — २०० ग्राम, (२ कटोरी), दूध — १ बड़ा चम्मच(वैकल्पिक), केसर — एक चुटकी(वैकल्पिक)
विधि- एक बर्तन में चीनी और पानी मिला कर गरम होने के लिये रखें। पानी में उबाल आने के बाद उसमें दूध डाल दें और जो गन्दे से झाग आयें उसे एक कलछी से प्लेट में निकाल दें। चाशनी बिलकुल पारदर्शक बनती है। अब इस चाशनी में केसर की पत्तियाँ डाल दें। करीब ८-१० मिनट उबालें।
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